जीवो मे जनन 12th ncert solution || ncert 12th biology chapter 1 solution

 

 जीवो में जनन 

विज्ञानं -: प्रकृति में उपस्थित सभी प्रकृति चीजों का अध्ययन करना ही विज्ञानं कहलाता है 

आधुनिक विज्ञानं के जनक गैलीलियो को माना जाता है 
जीव विज्ञानं के जनक अरस्तु है

अध्याय जनन 

जीवन अवधि :- जीव के जन्म से लेकर प्राकृतिक मृत्यु तक का समय जीवन अवधि कहता है 

जनन :- अपने सामान संतान उत्पन्न करना ही जनन कहता है 
इसे दो भागो में वांटा गया है।  (1) अलैंगिक जनन   (2) लैंगिक जनन 


अलैंगिक जनन :- इस प्रकार के जनन में सिर्फ एक ही जनक की आवश्यकता होती है 
और इससे जो संतान उत्पन्न होती है उसे क्लोन कहते है

EX :- अमीबा , स्पैरोगाईरा , प्रोटोजोआ संघ के सभी जीव आदि 
अलैंगिक जनन को इस प्रकार विभाजित किया गया

(1) व्दिविभाजन :- इस प्रकार के जनन में जनक दो भागो में टूटता है और दो नई अलग अलग संतान बनता है 
जैसे :- अमीबा 



Ex:- अमीबा , युग्लीना , सारे प्रोटोजोआ संघ के प्राणी 

(2) बीजाणु जनन :- इस विधि में जनक बीजाणु उत्पन्न करते है और बीजाणु अंकुरित होकर नयी संतान बना लेते है 
Ex :- penicillium


(3) मुकुलन :-  मुकुलन जनन की एक ऐसी प्रकिया है जिसमे जनक जीव के शरीर पर अंकुर मुकुल बनता है और धीरे धीरे से वह मुकुल एक अलग जीव बना लेता है 
एक समय ऐसा आता है जब मुकुल अपने जनक से अलग होकर एक नया जीव बना लेती है। 
Ex :- यीस्ट ,हाइड्रा

(4 ) खण्डी भवन :- खण्डी भवन जनन  की एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमे बहुकोशिकीय जनक अपने शरीर को खंडो में अर्थात टुकड़ो में विभाजित करता है और प्रत्येक विभाजित टुकड़ा नया संतान बनता है 

 Ex :- स्पायरोगायरा (spirogyra) यूलोथ्रिक्स 
कुछ तन्तुवात शैवाल जैस :-स्पायरोगायरा (spirogyra) यूलोथ्रिक्स  एवं कुछ अकशेरूकीय जन्तुओ में खण्डी भवन की क्षमता होती है 

(4 ) पुनरुदभवन :- पुनरुदभवन जनन की एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमे जनक के शरीर को आप जितनी बार भी काटेंगे तो वो कटा हुआ भाग एक नए जीव में परिवर्तित हो जाता है लेकिन कटे हुए भाग में केन्द्रक का अंश होना अनिवार्य है अगर कटे हुए भाग में  केन्द्रक का अंश नहीं है तो कटा हुआ भाग जल्दी है नष्ट हो जाता है 

 Ex :- अमीबा , स्पंज, hydra ,प्लनेरिया आदि में पुनरुदभवन की असीम क्षमता होती है 
पौधों में जनन को कायिक जनन कहते है 

लैंगिक जनन :-  ये प्रक्रिया जनन की एक जटिल प्रक्रिया है  इस प्रकार के जनन में दो विपरीत प्रकार के जनक नर व मादा  जनको की आवश्यकता है  
इससे जो संतान उत्पन्न होती है वो अपने जनक से भिन्न होती है 
विभिन्नता केवल लैगिंक जनन में पायी जाती है अलैंगिक जनन में नहीं 
लैंगिक जनन में नर में नर युग्मक और मादा में मादा युग्मक बनते है दो युग्मक कोशिकाएं लैंगिक प्रजनन के द्वारा संलयित होकर कोशिका का निर्माण  युग्मनज कहते है बहुकोशिकीय प्राणियों में इसे भ्रूण या जयगोट भी  है 
समयुग्मक :- अगर युग्मको की आकृति अगर सामान हो तो उसे संयुग्मक कहते है।  अगर  सयुग्मक मिलते है तो उसे संयुग्मन कहते है। 



लैंगिक जनन :-  लैंगिक जनन ३ चरणों में पूर्ण होता है 
  • निषेचन पूर्व घटना 
  • निषेचन 
  • निषेचन पश्च घटना 


निषेचन पूर्व घटना क्या  है :- 
इस घटना के अंतर्गत निषेचन से पूर्व दो प्रमुख घटनाएं होती हैं


  • युग्मक जनन 
  • युग्मक स्थनांतरण 

युग्मक जनन:- इस प्रक्रिया में युग्मको का निर्माण है 

नर में नर युग्मक अर्थात शुक्राणु , मादा में मादा युग्मक अर्थात अंडाणु बनते है 

युग्मक स्थानांतरण क्या है  :- इस प्रक्रिया में  नर एवं मादा युग्मकों का कायिक रूप से एक दूसरे के साथ संलयित होने की क्रिया की क्रिया युग्मक स्थानान्तरण कहते है। … 
पादपों में पराग की क्रिया पाई जाती है जिनके द्वारा नर युग्मक (परागकण) मादा युग्मक तक पहुंचता है।
और एक नया जीव बन जाता है 
युग्मक दो प्रकार के होते हैं
  • संयुग्मकी 
  • विषमयुग्मकी 

संयुग्मकी :- नर व मादा के युग्मक आकर आकृति में बराबर होते है रो उसे संयुग्मकी अगर  सयुग्मक मिलते है तो उसे संयुग्मन कहते है। 
 विषमयुग्मकी :- जब नर व मादा का युग्मक आकृति व आकर में सामान  तो उसे है 
निषेचन :- ये जनन की सर्वाधिक रोमांचित  एवं महत्वपूर्ण घटना है। यह क्रिया युग्मक संलयन भी कहलाती है इस में नर  आपस  संलयित होते है जिसके परिणाम स्वरुप व्दिगुणित युग्मनज का निर्माण होता है
* लेकिन कई ऐसे जीव है जैसे रोटीफर्स , मधुमक्खी , कुछ छिपकलियों में बिना निषेचन के अर्थ बिना नर युग्मक के मादा एक नयी संतान को जन्म देती है जिसे अनिषेक जनन कहते है  युग्मक संलयन कहा संपन्न होता है :- कई जीवो में युग्मक संलयन मादा शरीर के बहार होता है इनमे कुछ जलीय जीव जैसे शैवाल , मछलिया , आदि जीवो में , और कुछ स्थल पर रहने वाले जीवो में ये प्रक्रिया पायी जाती है 
इसे बाह्य निषेचन कहा जाता है 
आतंरिक निषेचन क्या है :- कई स्थलीय जीव जैसे फंजाई , उच्चश्रेणी के जीव , सरीसृप , स्तनधारी जीव , पक्षी एवं अधिकतर पादप में ये क्रिया पायी जाती है 
* इसमें युग्मक संलयन मादा शरीर के भीतर होता है जिसे आतंरिक निषेचन कहते है 
 

निषेचन पश्च घटना :- लैंगिक जनन होने वाली घटना के बाद युग्मज  निर्माण होता है जिसे निषेचन पश्च घटना कहते है 

भ्रूणोदभव :- भ्रूणोदभव युग्मनज के भ्रूण में परिवर्तित होने  प्रक्रिया को दर्शाता है इसे भ्रूण जनन भी कहते है।  
यह प्रक्रिया शूत्रीविभाजन द्वारा पूर्ण होती है 
भ्रूण विकास के दौरान जहा कोशिका विभाजन से कोशिकाओ  संख्या  वृद्धि होती है वही कौशिका का समूह एक निश्चित रूपांतरण से गुजरकर विशेषीकरण ऊतकों एवं अंगो का निर्माण करता है 




 

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